
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से उनके नेतृत्व में जल प्रबंधन के क्षेत्र में गुजरात ने जो नई राह चुनी उसी राह पर आगे बढ़ते हुए गुजरात सरकार ने देश को दिशा दिखाते हुए जल प्रबंधन के क्षेत्र में सफलता की नई गाथा लिखी है। यही वजह है कि नीति आयोग ने लगातार तीसरे वर्ष जल प्रबंधन के क्षेत्र में गुजरात को नंबर-1 घोषित किया है। यह गुजरात के लिए गर्व की बात है।
जल प्रबंधन के लिए गुजरात ने सुजलाम सुफलाम जल अभियान के अलावा सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना (सौनी योजना) और जल संचयन के लिए चेक डैम की योजना द्वारा जल संग्रहण का जो कार्य किया है, उससे गुजरात ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए आयाम हासिल किए हैं।
राज्य में प्राकृतिक जल के स्रोत को ऊंचा उठाने और बरसाती पानी के अधिकाधिक संचयन का लाभ नागरिकों और लाखों किसानों को उपलब्ध कराने के आशाय से शुरू किए गए राज्यव्यापी सुजलाम सुफलाम जल अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। जनभागीदारी से प्रेरित इस अभियान के चलते पिछले दो वर्ष में जल संग्रह क्षमता में 23,553 लाख घनफीट की बढ़ोतरी हुई है।
जिन तालाबों को गहरा किया गया गाद निकाली गई भूजल स्तर 5 से 7 फीट तक ऊंचा उठा है। इस जल संचयन के परिणामस्वरूप किसानों की सिंचाई, नागरिकों के पेयजल, घरेलू उपभोग का पानी और पशुओं के लिए पानी की समस्या काफी हद तक कम हो गई है।
इन उपलब्धियों के परिणामस्वरूप ही गुजरात ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में पूरे देश में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित किया है। जल सिंचन अर्थात टपक और फव्वारा पद्धति द्वारा सिंचाई। टपक और फव्वारा पद्धति से खेती कर किसान पानी का मितव्ययता से उपयोग करें इस उद्देश्य के साथ गुजरात सरकार ने वर्ष 2004-05 में गुजरात ग्रीन रिवॉल्यूशन कंपनी की स्थापना की।
इस कंपनी के माध्यम से वर्ष 2005-06 से लेकर इस वर्ष तक करीब 17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में टपक सिंचाई पद्धति से खेती हो रही है। इन तमाम प्रयासों के कारण ही गुजरात ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में ख्याति अर्जित की है।
अभय रावल, सेवानिवृत्त सूचना अधिकारी, अहमदाबाद
