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June 14, 2026
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जल संरक्षण के जरिए जल आत्मनिर्भरता का संदेश देगा उत्तराखंड

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देहरादून, Oct 1 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना है कि जल संरक्षण, संवर्धन के साथ साथ समुचित उपयोग से भारत जल आत्मनिर्भर राष्ट्र बने। देवभूमि उत्तराखंड माँ गंगा का उद्गम स्थल होने के साथ साथ गंगासागर तक मार्ग में आने वाले हर शहर गांव को जल से जीवन देने में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण को देखते आवश्यकता है कि जल आत्मनिर्भर देश बनाने का संदेश उत्तराखंड से दिया जाए।

जल शक्ति मंत्रालय एवम सरकारी टेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले जल प्रहरी समारोह आयोजन समिति ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर धामी को आमंत्रित करते हुए कहा कि दिल्ली सहित देश के कई राज्य उत्तराखंड से आपूर्ति होने वाले जल पर निर्भर हैं और इसलिए संवर्धन, संरक्षण का सन्देश अधिक आवश्यक हो जाता है।
उत्तराखंड “जल आत्म निर्भर” राज्य का आदर्श मॉडल है और अन्य राज्यों के लिए यह संदेश देने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

दिल्ली में आयोजित होने वाले जल प्रहरी समारोह-2021 के लिए आमंत्रित करने पहुंचे आयोजन समिति संयोजक अनिल सिंह एवम सरकारी टेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमेया साठे ने उत्तराखंड सरकार के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर धामी का आभार जताते हुए कहा कि जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहे जल प्रहरी समारोह के जरिए समूचे देश व विश्व को जल संरक्षण का संदेश दें।

उत्तराखंड राज्य ‘जल आत्म निर्भर” है इसके लिए राज्य सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। पहाडी इलाकों में पेयजल सुनिश्चित करने के लिए नल से जल परियोजना के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं वहीं जल संरक्षण के प्रयास भी आवश्यक हैं ताकि पूरे साल शुद्ध जल सुनिश्चित हो सके।जल संरक्षण का संदेश उत्तराखंड से गंगा सागर तक देने व जल आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को आज मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने दोहराया। उन्होंने कहा कि मां गंगा जीवन दायनी है और पहाड़ों से निकल रही नदियों के जल पर मानव जीवन निर्भर है।

विशेष तौर पर उत्तराखंड की नदियों, नहरों पर देश की राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों के लोग निर्भर हैं। शहरीकरण, बढ़ती आबादी के दबाव को देखते हुए जल संरक्षण, संवर्धन आज की आवश्यकता है। इसलिए जल संरक्षण कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के योगदान से ही जल आत्मनिर्भरता को हासिल किया जा सकता है।