भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज, 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह-II में वर्ष 2026 के लिए पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए। इसी अवसर पर मध्य प्रदेश के प्रख्यात समाजसेवी एवं पर्यावरण संरक्षक मोहन नागर को जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी क्षेत्रों में जनभागीदारी आधारित विकास कार्यों के लिए पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। गंगावतरण अभियान, माचना नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
मुख्य बिंदु
- मोहन नागर को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया।
- जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान।
- गंगावतरण अभियान और माचना नदी पुनर्जीवन अभियान को मिली राष्ट्रीय पहचान।
- आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, पर्यावरण और सतत विकास के लिए किया उल्लेखनीय कार्य।
नई दिल्ली मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध समाजसेवी, पर्यावरणविद् और जल संरक्षण कार्यकर्ता मोहन नागर को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, पर्यावरण संरक्षण तथा आदिवासी क्षेत्रों में जनभागीदारी आधारित विकास कार्यों के लिए प्रदान किया गया है।
मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं भारत भारती शिक्षा समिति, बैतूल के सचिव मोहन नागर पिछले तीन दशकों से अधिक समय से समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने जल संचयन, भूजल संरक्षण, वृक्षारोपण, नदी पुनर्जीवन और ग्रामीण विकास को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है।
राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर ने विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1991 से उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और पर्यावरण जागरूकता के लिए समर्पित रूप से कार्य करना शुरू किया। उनकी शिवध्वज यात्रा ने शिक्षा, जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश दूर-दूर तक पहुंचाया।
मोहन नागर द्वारा संचालित गंगावतरण अभियान देश के सफल पर्यावरण अभियानों में गिना जाता है। इस अभियान के तहत हजारों जल संरचनाओं का निर्माण किया गया, हजारों पौधे लगाए गए और भूजल संरक्षण को नई दिशा मिली। वहीं माचना नदी पुनर्जीवन अभियान ने नदी संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।
आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने सतपुड़ा क्षेत्र में 75 हजार जल संरचनाओं के निर्माण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों से कई आदिवासी गांवों में सौर ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिला और बैतूल का बाचा गांव “सोलर विलेज” के रूप में पहचान बनाने में सफल रहा।

at Jal Prahari Samman 2019 held at Constitution Club of India organised by Sarkaritel.com
मोहन नागर को इससे पहले राष्ट्रीय जल प्रहरी पुरस्कार (2019), वाटर हीरो पुरस्कार (2020) और भाऊराव देवरस सेवा सम्मान (2024-25) सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वे साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और उनकी कृति चातुर्मास को मध्य प्रदेश शासन द्वारा सम्मानित किया गया है।
निष्कर्ष
मोहन नागर को मिला पद्मश्री सम्मान देश में जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करता है। उनके कार्य यह साबित करते हैं कि जनभागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास संभव है। उनका जीवन समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
FAQ
प्रश्न 1: मोहन नागर को पद्मश्री क्यों दिया गया?
जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए।
प्रश्न 2: मोहन नागर किस राज्य से हैं ?
वे मध्य प्रदेश से हैं।
प्रश्न 3: गंगावतरण अभियान क्या है ?
यह जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा सामुदायिक अभियान है।
प्रश्न 4: माचना नदी पुनर्जीवन अभियान क्या है?
यह माचना नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए चलाया गया जनभागीदारी आधारित अभियान है।
प्रश्न 5: मोहन नागर को पहले कौन-कौन से पुरस्कार मिल चुके हैं?
राष्ट्रीय जल प्रहरी पुरस्कार, वाटर हीरो पुरस्कार और भाऊराव देवरस सेवा सम्मान सहित कई सम्मान।
