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त्रिकुट पर्वत की गोद में उगता हरित भविष्य : वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित कुनिया वन नर्सरी

त्रिकुट पर्वत की गोद में उगता हरित भविष्य : वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित कुनिया वन नर्सरी
कुनिया नर्सरी से अमेय साठे

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में अनेक उल्लेखनीय पहलें की जा रही हैं। इन्हीं प्रयासों की श्रृंखला में कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी एक आदर्श परियोजना के रूप में उभरकर सामने आई है।

माँ वैष्णो देवी की पवित्र नगरी कटरा के समीप स्थित यह नर्सरी त्रिकुट पर्वत क्षेत्र की हरियाली को सहेजने, जैव विविधता को संरक्षित करने और सतत विकास को प्रोत्साहित करने में एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

कुनिया नर्सरी की सुबह बेहद खूबसूरत होती है—ओस से चमकते पौधे, पहाड़ी हवा में तैरती मिट्टी की खुशबू और दूर खड़े त्रिकुट पर्वत की शांत ऊर्जा। यहाँ काम करने वाले श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी विजय खजूरिया ने कहा “हम यहाँ पौधे नहीं, भविष्य उगाते हैं।”

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में अनेक उल्लेखनीय पहलें लगातार आकार ले रही हैं। प्रकृति के प्रति यह संवेदनशील दृष्टि केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि धरती को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का एक सशक्त संकल्प है। इसी श्रृंखला में कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसने न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी को नया जीवन दिया है, बल्कि यह सिद्ध भी कर दिया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में सतत् विकास की सोच कैसे जमीनी हकीकत बन सकती है।

कहने को यह एक नर्सरी है, लेकिन इसमें उग रहे पौधों की कतारों के साथ-साथ यहाँ उम्मीद, दृष्टि और संवेदनशीलता भी पल्लवित होती दिखती है।

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त्रिकुट पर्वत की शांत ढलानों पर जब कोहरा धीरे-धीरे छंटता है, तो उसके पीछे से एक ऐसी जगह उजागर होती है जहाँ हरियाली सिर्फ दिखाई नहीं देती, बल्कि साँस लेती है। यह जगह है—कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) की उन कई पहलों में से एक, जो प्राकृतिक संरक्षण और सतत विकास को नया अर्थ दे रही हैं।

श्राइन बोर्ड द्वारा इस नर्सरी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वनावरण में वृद्धि, स्थानीय पौध प्रजातियों का संरक्षण, और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है। यहाँ उगाए जाने वाले पौधे न केवल त्रिकुटा पर्वत क्षेत्र की पारिस्थितिकी को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि तीर्थ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता में भी वृद्धि करते हैं।

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श्राइन बोर्ड पिछले कई वर्षों से तीर्थ स्थल के आसपास के पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है। लाखों यात्री हर वर्ष माता के दरबार में आते हैं—और उनकी बढ़ती संख्या के बीच इस धरती की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा एक बड़ी चुनौती है। कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी इसी चुनौती का समाधान बनकर उभरी है।

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कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी की सुबह कुछ अलग ही होती है—ओस से भीगे पौधों पर चमकती धूप, हल्के कोहरे के बीच उभरती हरियाली और प्रकृति की गोद में मेहनत कर रहे श्राइन बोर्ड के कर्मचारी। यहाँ केवल पौधे नहीं, बल्कि उम्मीदें तैयार होती हैं। हर छोटी पौध, हर उगती कोंपल उस दूरदर्शी प्रयास की गवाह है जिसके पीछे उद्देश्य है: त्रिकुट पर्वत की पवित्र भूमि को और अधिक हराभरा, स्वच्छ और जीवंत बनाना।

नर्सरी में उगाए जा रहे पेड़ों की विविध प्रजातियाँ—स्थानीय संवर्धन में महत्वपूर्ण देवदार, चीड़, चिनार, अरोड़ा से लेकर शोभात्मक पौधों तक—यात्रियों के मार्ग को छाया, हवा और सौंदर्य का वरदान देने वाली भविष्य की हरियाली हैं। आधुनिक सिंचाई तकनीकों, वर्षा जल संचयन, ऑर्गेनिक कंपोस्ट और नियंत्रित तापमान इकाइयों का उपयोग नर्सरी को एक ग्रीन टेक्नोलॉजी मॉडल बनाता है।

कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए प्रकृति-शिक्षा का जीवंत स्थल बनती जा रही है। आगंतुक यहाँ आकर समझते हैं कि यात्रा केवल भक्तिभाव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी है।

परियोजना का अंतिम लक्ष्य स्पष्ट है—”ग्रीन वैष्णो देवी”। इस नर्सरी से तैयार होने वाले हजारों पौधे आने वाले वर्षों में तीर्थ मार्ग, ट्रैकिंग पथ, मंदिर परिसर और आसपास के वनक्षेत्रों में नई ऊर्जा, नई सांसें और नए रंग भरेंगे।

कह सकते हैं कि कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि यह एक हरित भविष्य की कहानी है—जहाँ आध्यात्मिक आस्था और पर्यावरणीय संतुलन साथ-साथ बढ़ते हैं, और जहाँ विकास का अर्थ है प्रकृति के साथ सामंजस्य, टकराव नहीं।

कुनिया नर्सरी में कुल 130 प्रजातियाँ विकसित की जा रही हैं, जिनमें 70 वानिकी (Forestry) और 60 पुष्पीय (Floriculture) प्रजातियाँ शामिल हैं। नर्सरी में पौध उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु हाई-टेक चेंबर और पॉलीहाउस स्थापित किए गए हैं, जिनसे पौधों की वृद्धि नियंत्रित तापमान और आर्द्रता में सुनिश्चित की जाती है।

कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी की सबसे बड़ी विशेषता इसका विविध पौध संग्रह है, जिसमें ऐसे पेड़-पौधे शामिल हैं जो न केवल पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करते हैं बल्कि स्थानीय जैव-विविधता को भी समृद्ध बनाते हैं। नर्सरी में उगाई जा रही मुख्य प्रजातियों में अर्जुन, आंवला, अमरूद, जामुन, सिल्वर ओक, बाऊहिनिया, सुख चेन और अमलतास जैसी पौध प्रजातियाँ शामिल हैं—प्रत्येक अपने भीतर प्रकृति का एक विशिष्ट योगदान समेटे हुए।

नर्सरी में पौधों की सिंचाई हेतु रेन गन स्प्रिंकलर सिस्टम स्थापित किया गया है, जिससे जल का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है । इस प्रणाली को संचालित करने के लिए 16 किलोवाट सौर ऊर्जा (Solar Energy) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे नर्सरी पूर्णतः पर्यावरण-मित्र (Eco-friendly) और ऊर्जा आत्मनिर्भर बन चुकी है।

नर्सरी में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट (Vermi Compost Unit) भी स्थापित की गई है, जहाँ जैविक अपशिष्ट को पुनर्चक्रित कर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (Organic Manure) तैयार की जाती है। यह खाद पौधों की वृद्धि में सहायक होने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और सूक्ष्मजीव संतुलन को बनाए रखती है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होकर पर्यावरणीय प्रदूषण में भी कमी आई है।

कुनिया नर्सरी में एक QR आधारित सूचना प्रणाली (QR-based Information System) स्थापित की गई है, जो इस क्षेत्र में एक अद्वितीय नवाचार है। इस प्रणाली के माध्यम से आगंतुक, विद्यार्थी और शोधकर्ता अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन कर पौध प्रजातियों के वैज्ञानिक नाम, उपयोग, वृद्धि की प्रक्रिया और संरक्षण संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल डिजिटल लर्निंग और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देती है।

नर्सरी परिसर में एक नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर (Nature Interpretation Centre) और सीड बैंक (Seed Bank) भी स्थापित किए गए हैं। यह केंद्र विद्यालयों के विद्यार्थियों, वन प्रशिक्षणार्थियों (Forestry Trainees) और अनुसंधानकर्ताओं के लिए अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण का उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है। यहाँ जैव विविधता, पौध प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया जाता है।

श्राइन बोर्ड स्थानीय समुदायों, विद्यालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं को वृक्षारोपण और पौध संरक्षण अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल कर रहा है। इस सहभागिता से पर्यावरणीय चेतना और जिम्मेदारी समाज के हर वर्ग तक पहुँच रही है।

कुनिया फॉरेस्ट नर्सरी माँ वैष्णो देवी के आशीर्वाद से प्रेरित एक ऐसा पवित्र स्थल है जहाँ आस्था, विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम दिखाई देता है। यह पहल को एक स्वच्छ, हरित और संतुलित प्रदेश बनाने की दिशा में श्राइन बोर्ड की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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