– नवंबर माह के निर्यात के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में आई मजबूती साफ तौर पर झलकती है
– कई देश मंदी की चपेट में हैं तो वहीं भारत ने उत्पादन और निर्यात की दृष्टि से शानदार प्रदर्शन किया है
नई दिल्ली, 17 दिसंबर: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है। वैश्विक मंच पर भारत एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरा है और भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति को दुनिया उत्सुकता और आश्चर्य से देख रही है। उन्होंने कहा कि भारत के आलोचक भी मान रहे हैं कि अर्थव्यवस्था जिस तेजी के साथ बढ़ रही है, उसके बाद अनुमान है कि वर्ष 2027 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
शेखावत ने कहा कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा नवंबर माह के जारी निर्यात के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में आई मजबूती साफ तौर पर झलकती है। यह आंकड़े उत्साहवर्धक हैं। पिछले एक महीने के आंकड़ों को देखें तो साफ है कि एक तरफ दुनिया में कई देश मंदी की चपेट में हैं, तो वहीं भारत ने उत्पादन और निर्यात की दृष्टि से शानदार प्रदर्शन किया है। निर्यात में 10.79% की बढ़ोतरी हुई है। ये पीएम मोदी द्वारा उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए सकारात्मक कदम का ही नतीजा है।
शेखावत ने कहा कि भारत के आलोचक भी मान रहे हैं कि अर्थव्यवस्था जिस तेजी के साथ बढ़ रही है, उसके बाद अनुमान है कि वर्ष 2027 तक भारत तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। पिछले आठ साल में निर्यात में 55% की बढ़ोतरी हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कई प्रगतिशील कदम उठाए गए हैं, जिससे इस सेक्टर में साढ़े चार सौ प्रतिशत निवेश बढ़ा है। इसके अलावा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार आया है। देश में सुरक्षा और स्थायित्व का माहौल बना है। अन्य देशों के राष्ट्रध्यक्षों के साथ प्रधानमंत्री के कूटनीतिक संबंध प्रगाढ़ होने का भी देश को विदेशी निवेश में बढ़ोतरी के रूप में फादया मिल रहा है। भारत अब मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बन रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की भारतीय अर्थव्यवस्था पर हालिया टिप्पणी पर कहा कि राजन ने क्या कहा, यह उनकी राय है, लेकिन दुनिया भर की संस्थाएं कह रही हैं कि भारत की ग्रोथ सात से आठ प्रतिशत रहेगी। रघुराम राजन ने तो ये भी कहा था कि मुद्रा लोन में एनपीए हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगले तीन-चार साल में भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में उनके विचार बदलेंगे।
मेक इन इंडिया ने बनाया रिकॉर्ड
शेखावत ने कहा कि मेक इन इंडिया नीति के तहत विनिर्माण के क्षेत्र में भारत ने 400 बिलियन डॉलर माल का निर्यात कर रिकॉर्ड बनाया। वर्ष 2018-19 में 330 बिलियन डॉलर का निर्यात किया गया। इसके अलावा आरसीईपी के तहत 12 देशों के साथ निर्यात बढ़ाया गया जो वर्ष 2020-21 में 42.32 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, भारत अभी भी व्यापार घाटे को कम करने के लिए संघर्ष कर रहा है, जोकि 25 बिलियन अमरीकी डालर है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आरसीईपी समझौते के तहत 90 प्रतिशत उत्पादों से टैरिफ हटाने का प्रस्ताव है। अगर इसे स्वीकार कर लिया जाता तो भारत का बाजार आरसीईपी देशों से भारी आयात के लिए खुल जाता, जबकि गैर-टैरिफ बाधाओं के संबंध में विश्व व्यापार संगठन के दायित्वों का सम्मान करने के लिए भारत को चीन से कोई गारंटी नहीं मिलती है। जिसका इस्तेमाल वह खासतौर पर फार्मा और आईटी में भारत के खिलाफ करता है।
मेक इन इंडिया नीति उन क्षेत्रों में विनिर्माण में आत्मनिर्भरता बनाने पर ध्यान केंद्रित करती है, जहां चीन गैर-टैरिफ बाधाएं पैदा करता है। उदाहरण के लिए भारत ने चीन से एपीआई पर निर्भरता को 48 से घटाकर 24 कर दिया। 21,000 करोड़ मूल्य के फार्मा कारोबार के लिए मेक इन इंडिया नीति के तहत पीएलआई योजना लॉन्च की गई है और 2013-14 से फार्मा निर्यात में 103% की वृद्धि देखी गई है, जो 2013-14 में 90,415 करोड़ रुपये से बढ़कर 2021-22 में 1,83,422 करोड़ रुपये हो गई है।
शेखावत ने कहा कि मेक इन इंडिया एक समग्र योजना है जिससे कृषि और उससे संबद्ध उत्पाद, रक्षा उत्पाद धीरे-धीरे उन क्षेत्रों में बढ़ रहे हैं जहां यह परंपरागत रूप से कमजोर रहे हैं। वर्ष 2009-14 तक कृषि क्षेत्र में निर्यात 89 हजार करोड़ था, जो 2014-19 के बीच बढ़कर 1.93 लाख करोड़ हो गया और 2021-22 में यह बढ़कर 3 लाख करोड़ के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। वर्ष 2014 में भारत का रक्षा आयात इस क्षेत्र में निर्यात के 40 गुना था, लेकिन मेक इन इंडिया के तहत अब इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान रक्षा निर्यात 14000 करोड़ रुपये रहा है। वहीं, वर्ष 2012-16 की तुलना में 2017-21 की अवधि में आयात में 21 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इस प्रकार मेक इन इंडिया ने पहले से वंचित क्षेत्रों को पोषित करना, उन्हें ताकत देना शुरू कर दिया है। जब भी चीन और भारत के बीच व्यापार बढ़ा है, इसमें चीन निर्मित मोबाइल फोन की बड़ी हिस्सेदारी देखी गई, लेकिन मेक इन इंडिया के तहत सरकार ने उच्च कौशल तकनीक का विकास किया और इसका नतीजा यह हुआ कि आज चीन से मोबाइल फोन का आयात 2021-22 में 55 प्रतिशत घटकर 626 मिलियन डॉलर रह गया है, जो 2020-21 में 1.4 बिलियन डॉलर था। दूसरी ओर, मेक इन इंडिया के कारण भारत ने 2022 में 43,500 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात किया, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 75% अधिक है।
शेखावत ने कहा कि खिलौना निर्माण में चीन का बड़ा हिस्सा था, लेकिन मेक इन इंडिया के तहत घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि के कारण वर्ष 2021-22 में खिलौनों का आयात 70% घटकर 877.8 करोड़ रुपये हो गया है। मेक इन इंडिया के लिए भारत में असेंबलिंग के माध्यम से मूल्य संवर्धन भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। चीन ग्लोबल असेंबली हब है, लेकिन मेक इन नीति ने फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन, विस्ट्रॉन जैसी दिग्गज कंपनियों के भारत आने की राह को प्रशस्त किया और अब ये कंपनियां भारत में अपने प्लांट लगा रही हैं। आरसीईपी समझौता कुछ उत्पादों के आयात/निर्यात या किसी देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए आवश्यक उत्पादों के भू-राजनीतिक प्रभाव को ध्यान में नहीं रखता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया नीति से यह साफ हुआ कि व्यापार को भारत के खिलाफ भू-राजनीतिक उद्देश्यों के लिए हथियार बनाया जा सकता है। इसलिए सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण के लिए 10 बिलियन डॉलर की पीएलआई योजना लेकर आई। 27 अरब डॉलर का घरेलू बाजार होने के बावजूद भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की कल्पना कभी नहीं की गई थी, लेकिन आज वेदांता और फॉक्सकॉन गुजरात में भारत का पहला सेमीकंडक्टर उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए 1.54 लाख करोड़ का निवेश कर रहे हैं। भारत को सौ फीसदी मेड इन इंडिया 5G सेवा, आर्किटेक्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर को रोल आउट करने पर गर्व है।
