धरती मां है, जल उसके शरीर का रक्त और जंगल फेफड़े़

Sarkaritel
By Sarkaritel December 10, 2019 15:20


वास् तविक स्थिति रू हम सभी जानते हैं कि बुन् दलेखण् ड क्षेत्र अल् प वर्षा वाला क्षेत्र है। यहाँ वर्षा, असमय वर्षा के कारण वर्षभर सूखा ही रहता है। 10-12 वर्षों से अल् प वर्षा और कभी-कभार अति वर्षा और ओला वृष्टि की मार झेलते-झेलते किसान और उसकी खेती-बाड़ी दोनों ही समाप् त होने के कगार पर हैं। केन् द्रीय ग्राउण् ड वाटर बोर्ड की रपट के अनुसार बुन् दलेखण् ड में कई जगहों में भूजल स् तर 400 फीट से भी नीचे पहुँच चुका है। सूखा के कारण खेती, पशुपालन, बागवानी एवं कुटीर उद्योग जैसे जीविकापरक संसाधन धीरे-धीरे समाप् त होने की स्थिति में पहुँच गये हैं। जिसके कारण यहां के लोग गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, कुपोषण से प्रभावित हैं। गाँव के लगभग 60 प्रतिशत लोग जीविका की खोज में अपने गाँव, अपनी ग्राम संस् कृति, अपने सम् बन् धों को छोड़कर देश के विभिन् न महानगरों में पलायन कर गये हैं।

प्रेरणा एवं प्रयास इन सभी परिस्थितियों से प्रेरित होकर हमने वर्ष 2010 में बुन् देलखण् ड ग्राम सेवा भारती नाम से एक संस् था का गठन किया। इस संस् था के बैनर के नीचे हम जल-प्रबन् धन, गौपालन, बागवानी, शिक्षा आदि क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। इन सभी कार्यों में प्रमुख कार्य हैं, वर्षा जल संचय। वर्ष 2010 में हमने तीन तालाब तथा एक चेकडैम का निर्माण किया तथा इसमें वर्षा जल एकत्र कर 50 बीघे जमीन को सिंचित कर पर्याप् त खाद्यान् न उपजाया। खेती से जो अतिरिक् त आय हुयी उससे वर्ष 2011, 12 में तीन और तालाब बनाये। इस प्रकार वर्ष 2010 से 2012 तक छह तालाब बनकर तैयार हुए और इनसे 100 बीघे जमीन को पर्याप् त पानी मिलने लगा। इस अभिनव प्रयास और प्राप् त परिणाम को प्रिंट मीडिया, इलेक् ट्रानिक मीडिया ने अपने प्रकाशनों में जगह दी।

अब हमारा कार्य सरकारी, गैरसरकारी संस् थाओं के परिचय में आ गया। वर्ष 2013 में हमने जिलाधिकारी श्री अनुज झा, कृषि विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, समाजसेवी संस् थाओं, ग्रामीणजनों, ग्रामप्रधानों  को एक साथ एकत्र कर जल संकट, समस् या और समाधान विषय पर एक गहन वार्ता का आयोजन किया। हमारे कार्य की सफलता और ग्रामवासियों की तालाब की मांग को देखकर जिलाधिकारी महोदय ने ‘अपना तालाब’ नाम से एक कार्ययोजना बनायी, इस कार्य योजना में मुझे भी एक सदस् य से रूप में जोड़ा और ग्राम-काकुन को वर्षा जल संग्रहण के लिए एक मॉडल गाँव के रूप में चुना गया। वर्ष 2013, 14, 15, 16 में मेरे ग्राम पंचायत के अलावा पाँच अन् य ग्राम पंचायतों में लगभग 200 तालाब खोदे गये। मैंने अपने मित्रों के सहयोग से इस कार्य हेतु एक खुदाई मशीन को खरीदा।

भविष् य की कार्य योजना 10 ग्राम पंचायतों के बरसाती नालों की खुदाई करके उन् हें केनाल या बरसाती नदी के रूप में बदलना है। नाले के दोनों किनारों पर सघन वृक्षारोपण करना। सोलर पम् प लगाकर नाले के दोनों ओर के किसानों को सिंचाई हेतु जल प्रदान कर बागवानी, पशुपालन (गौपालन), सब् जी उद्योग के माध् यम से उनकी आय में वृद्धि करना तथा ज् यादा से ज् यादा रोजगार सृजित करना।

(अ) 5 ग्राम पंचायत 25 बरसाती नालों को 10 किमी के वर्ग क्षेत्रफल में वर्षा जल संग्रहण केन् द्र के रूप में तैयार करना, (आ) वृक्षारोपण, 1 लाख नीम एवं फलदार वृक्ष, (इ) अनुमानित व् यय 10 करोड़ रुपये

– धर्मेन् द्र कुमार मिश्र
ग्राम-काकुन, तहसील-चरखारी, जिला-महोबा (उ0प्र0)

Sarkaritel
By Sarkaritel December 10, 2019 15:20

Search the Website

Advertiser’s Logos

Water Conservation

हम सबको अपने घरों के टंकी में अलार्म सिस्टम लगाना चाहिए, ताकि जब कभी पानी की टंकी भर जाए तो आपको पता चल सके।

Sarkaritel.com Interview with U P Singh (IAS), Secretary, Ministry of Jal Shakti & Drinking Water & Sanitation by Ameya Sathaye, Publisher & Editor-in-Chief, Sarkaritel.com

HEALTH PARTNER