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June 8, 2026
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यूपी : RRR केंद्र बने खुशियों का ठिकाना, छात्राओं ने सुझाए स्वच्छ दिवाली मनाने के विकल्प

celebration

गाजियाबाद के स्कूल में लगाई गई ‘कबाड़ से जुगाड़’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी

सिधौली में RRR केंद्र पर कपड़े बांटकर जरूरतमंदों का पर्व बनाया गया खास

New Delhi, Nov 09: आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत चलाए जा रहे अभियान के तहत देशभर के शहरों ने इसे ‘स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली’ के संदेश के साथ मनाने के लिए कमर कस ली है। हर ओर इस अभियान का असर दिख रहा है और इसके लिए चलाए गए ऑनलाइन सिग्नेचर कैंपेन में बहुत तेजी से लोग बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में स्कूली छात्राओं ने ‘कबाड़ से जुगाड़’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी के माध्यम से स्वच्छ एवं हरित दिवाली मनाने के लिए सभी विकल्प सुझाए। वहीं दूसरी ओर सिधौली नगर पंचायत क्षेत्र में Reduce, Reuse, Recycle (RRR) केंद्र पर आने वाले कपड़े बांटकर जरूरतमंदों का पर्व खास बनाया गया।

Ghaziabad UP Story Pic kabad se jugad.jpg

गाजियाबाद के चंद्रपुरी स्थित नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज में छात्राओं द्वारा लगाई गई यह प्रदर्शन विशेष तौर पर स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली मनाने के संदेश के लिए समर्पित रही। छात्राओं ने वेस्ट थर्माकोल से अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर, केदारनाथ धाम, ताजमहल समेत अन्य मॉडल्स बनाए। वहीं पुराने कपड़े को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए कपड़े के थैलों में परिवर्तित कर अनोखी प्रदर्शनी लगाई, जिसके माध्यम से बाजारों से सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह खत्म करने का संदेश दिया गया। इसी तरह से छात्राओं ने मिट्टी के बर्तनों, दीयों व कलाकृतियों समेत वेस्ट मैटीरियल से बनाए गए सजावटी सामान को प्रदर्शनी में सजाकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के संदेश को आगे बढ़ाया, ताकि स्थानीय विक्रेताओं का त्योहार खास भी बन सके।

उत्तर प्रदेश के ही सीतापुर जिले के अंतर्गत आने वाले सिधौली में आरआरआर केंद्र को अधिकारियों ने जरूरतमंदों के लिए खोल दिया, जिन्हें वहां से मनचाहे कपड़े और खिलौने चुनने का अवसर देकर महिलाओं बच्चों समेत हर उम्र के लोगों का त्योहार खास बनाया गया। इसके साथ ही अधिकारियों ने वीडियो संदेश जारी करते हुए लोगों से ज्यादा से ज्यादा चीजें आरआरआर कंद्रों में दान करने की अपील की, ताकि वेस्ट के रूप में निकलने वाले ऐसे सामान दूसरों के काम आ सकें, जो एक बार इस्तेमाल हो चुके हैं और घरों में बिना इस्तेमाल किए पड़े हुए हैं।