जल वंचित होने से पहले करें संचित

Sarkaritel
By Sarkaritel November 22, 2019 14:50


हम सब जानते हैं कि हमारे देश की आधी से ज्यादा जनसंख्या भूमिगत जल पर निर्भर है, पर दुर्भाग्य से भूगर्भ में स्थित इस जल को लेकर आज अधिकांश लोग गलतफहमी का शिकार हैं कि इस भूमिगत जल की उपलब्धता असीमित है। उनको ज्ञात नहीं है कि भूमि से जल का लेना और पुनः भूमि में जल का पहुंचना एक चक्रीय प्रक्रिया है । मानव अपने कार्यों हेतु भूमि से जल प्राप्त करता है और वर्षा ऋतु में वर्षा जल पुनः भूमि में पहुंचकर भूमि के जल भंडार को पूर्ण कर देता है। हम लोगों ने जल के इस प्राकृतिक चक्र को बरकरार नहीं रखा और परिणाम हम सब लोगों के सामने हैं। आज विश्व की लगभग 75ः जनसंख्या पूरे वर्ष के किसी ना किसी महीने में जल संकट का जरूर सामना करती है।

लगातार बढ़ती जनसंख्या एवं ओद्यौगिकरण के चलते हर ओर कंक्रीट का जाल बिछा दिया गया और दुर्भाग्यवश मिट्टी में विभिन्न प्रकार के अपद्रव्य जैसे प्लास्टिक इत्यादि के मिल जाने से भी अधिकांश वर्षा जल भूमि में नीचे जाकर समुद्र में पहुंचकर बर्बाद होने लगा । ऐसे में भूमिगत जल का स्तर लगातार कम हो रहा है और लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी नित्य प्रयास करना पड़ रहा है। हो सकता है कि अभी आप सौभाग्यशाली हो कि सुबह उठकर आपको पानी के इंतजाम के बारे में नहीं सोचना पड़ता हो लेकिन विश्वास करें यदि सजग ना हुए तो यह सौभाग्य बहुत दिन तक नहीं चलने वाला। साउथ अफ्रीका के शहर केपटाउन एवं अपने चेन्नई जैसे शहरों ने कुछ वर्षों पहले तक सोचा भी नहीं होगा कि समुद्र के किनारे होने के बावजूद वे पहले जल वंचित शहर बनेंगे।

जल संकट का समाधान जल की बर्बादी रोककर एवं वर्षा जल का संरक्षण करके ही हो सकता है। अतः पानी की बर्बादी रोकने के लिए साधारण एवं व्यवहारिक तरीके अपनाने होंगे और वर्षा जल संरक्षण के लिए जनमानस की भागीदारी के साथ सरकारों को त्वरित कदम उठाते हुए सार्थक पहल करनी होगी । यदि समय रहते यह सब शुरू हो जाता है तो स्थिति बहुत हद तक नियंत्रण में रखी जा सकती है अन्यथा कुछ वर्षों में ही चुनौतियां शायद नियंत्रण से बाहर हो जाएं और साधारण सा दिखने वाला यह जल संकट अपने विकराल रूप में आ जाए।हमें याद रखना होगा की अवसर भी सीमित समय के लिए ही होते हैं। जाएगा।

पीने योग्य जल की बर्बादी का एक बड़ा कारण पीने योग्य जल की उपलब्धता के बारे में तथ्यों की जानकारी का ना होना भी है क्योंकि मानव इतना संवेदनहीन भी नहीं हो सकता की किसी दूसरे को प्यासा छोड़कर वह 40 . 50 लीटर साफ पानी से अपनी कार धोए या सैकड़ों लीटर पीने योग्य पानी से अपने आंगन या छत को साफ करें अथवा ठंडा करें।

भारतीय संस्कृति में जल का वरुण देव के रूप में पूजन होता रहा है ।अतः जल को साक्षात ईश्वर मान के उसकी एक.एक बूंद को महत्व देंएजल की बर्बादी ईश्वर का निरादर होता है। हमारे बच्चे अन्न नहीं पिएंगेए धन नहीं पिएंगेए बड़े.बड़े महलनुमा घरों को नहीं पिएंगे अगर कोई चीज उनकी प्यास बुझाएगी तो वह है पानी। ध्यान रहे की प्रकृति द्वारा दिए गए जल को संभाला तो जा सकता है लेकिन पैदा नहीं किया जा सकता।

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By Sarkaritel November 22, 2019 14:50