-तनसिंह की 100वीं जयंती पर केसरियामयी हुई दिल्ली
नई दिल्ली। देश और समाज की रक्षा करने में क्षत्रिय हमेशा आगे रहते हैं। न्याय और धर्म की रक्षा करना ही क्षत्रिय धर्म है। यह कहना है केंद्रीय सूचना और प्रसारण, और युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर का। रविवार को श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक पूज्य तनसिंह जी की 100वीं जयंती पर दिल्ली में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। दरअसल, श्री क्षत्रिय युवक संघ द्वारा अपने संस्थापक तनसिंह की 100वीं जयंती को दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में मनाया गया। इस दौरान दिल्ली केसरियामयी हो गई।

यह देश की राजधानी में होने वाला राजपूतों का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन रहा, जिसमें देश भर से बड़ी संख्या में राजपूत अपने प्रेरणास्रोत तनसिंह के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और सामाजिक एकता का संदेश देने के लिए जुटे। श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर और संघप्रमुख लक्ष्मण सिंह बैण्याकाबास के सानिध्य में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में देश भर से राजपूत समाज के राजनेता, अधिकारी, उद्योगपति, धार्मिक और सामाजिक व्यक्तित्व और अनेकों प्रतिष्ठित व्यक्ति इस शामिल हुए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भी उपस्थित रही। दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में रहने वाले राजपूतों के साथ ही हरियाणा और उत्तरप्रदेश के राजपूत भी प्रमुखता से कार्यक्रम में शामिल हुए। राजस्थान से भी कार्यक्रम में पहुंचने के लिए 16 विशेष ट्रेन बुक की गई। गुजरात और महाराष्ट्र से भी ट्रेन और बसों से बड़ी संख्या में राजपूत कार्यक्रम में शामिल हुए। दक्षिण भारत के कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्यों से भी लोग इस समारोह का हिस्सा बनने के लिए आए। तनसिंह जी आधुनिक युग के अग्रणी क्षत्रिय विचारक है जिनके आदर्शों को अपनाकर आज अनेकों क्षत्रिय युवा समाज और राष्ट्र की सेवा में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवान सिंह रोलसाहबसर ने कहा कि तनसिंह ने समाज की सेवा के माध्यम से जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त करने का मार्ग श्री क्षत्रिय युवक संघ के रूप में दिया । त्याग, तपस्या और संयम का यह मार्ग मुश्किल जरूर है लेकिन समाज में वास्तविक परिवर्तन इसी से आ सकता है। तनसिंह द्वारा स्थापित यह संगठन पिछले 77 वर्षों से निरंतर आगे बढ़ रहा है।
संघ का मूल कार्य शाखा और शिविरों के माध्यम से युवा पीढ़ी में क्षत्रियोचित संस्कारों का निर्माण करना है जिससे क्षात्रधर्म का पालन करते हुए हम गीता में कही गई परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम् की क्षत्रिय की परिभाषा को सार्थक कर सकें। उन्होंने कहा कि तनसिंह ने भगवदगीता के आधार पर ही श्री क्षत्रिय युवक संघ का दर्शन रचा है। अभ्यास और वैराग्य पर आधारित संघ की प्रणाली व्यक्ति को सभी परिस्थितियों में अपने लक्ष्य पर दृढ़ रहने योग्य बनाती है। ऐसे ही व्यक्तियों से कोई समाज और राष्ट्र महान बनता है। श्री प्रताप फाउंडेशन के संयोजक महावीर सिंह सरवड़ी ने कहा कि राजपूत समाज पर आज चारों ओर से आक्रमण हो रहे हैं। हमारे उज्ज्वल इतिहास को बिगाडऩे और विकृत करने के प्रयास हो रहे हैं और इन प्रयासों को अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए राजनेताओं का समर्थन भी मिल रहा है।
राजनीति, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों में राजपूत समाज को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। मीडिया, सिनेमा आदि राजपूत समाज के प्रति दुष्प्रचार में भी संलिप्त हो रहे हैं। ऐसी अनेक समस्याएं हैं लेकिन इन सभी समस्याओं का समाधान तभी हो सकता है जब हम संगठित हों। श्री क्षत्रिय युवक संघ इसी संगठन के लिए प्रयासरत है। वहीं, श्री क्षत्रिय युवक संघ के संघप्रमुख लक्ष्मण सिंह बैण्याकाबास ने कहा कि आज का यह सम्मेलन हमारी एकता और अनुशासन का ज्वलंत प्रमाण है। यह हमारी सामर्थ्य और संकल्प का संदेश है जो पूरा देश आज सुन रहा है। श्री क्षत्रिय युवक संघ समाज में सुख, शांति और समृद्धि लाने के लिए अपने आप को निखारने और समाज की सेवा में नियोजित होने का प्रशिक्षण देता है। उन्होंने कहा कि स्वयं का निर्माण किए बिना समाज में बदलाव की कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती। स्वयं का निर्माण करने के लिए साधना की आवश्यकता होती है और उसी साधना का प्रशिक्षण श्री क्षत्रिय युवक संघ द्वारा दिया जाता है।
