NHPC launches a Internet cloud based software application

By Sarkaritel August 9, 2022 18:12

NHPC launches a Internet cloud based software application

NHPC launches a Internet cloud based software application for Early Warning Systems (EWS) and achieves major milestones at 2000 MW Subansiri Lower Project

Faridabad, Aug 09: A.K. Singh, CMD, NHPC launched an Internet cloud based software application for Early Warning System on 8th August 2022 at NHPC Corprate Office, Faridabad. Y.K. Chaubey, Director (Technical), R.P. Goyal, Director (Finance) and senior officers from NHPC’s Regional Offices, Power Station, Projects and units also participated in the programme through video conferencing.

The software will enable tight monitoring of water levels/discharge of tributaries/rivers along with close coordination with the Project/Power station at upstream and downstream of such identified vulnerable projects on real time basis. It shall further issue alerts/warnings to concerned Project authorities/Stakeholders and local administration to give time to the people to react during floods, enabling local administration and people to evacuate or shelter before a flood. 

Hydroelectric projects are usually located in mountainous areas and are vulnerable to many types of disasters like Landslide, Cloudburst, Flood, Avalanche, GLOF (Glacial Lake Outburst Floods) and LLOF (Landslide Lake Outburst Floods etc. In recent years, the Himalayan region has witnessed several calamities, resulting in flash floods in the downstream areas, in which many lives have been lost, hydroelectric projects and other infrastructure have been damaged. A natural calamity took place in Feb’ 2021 at Chamoli District of Uttarakhand wherein few hydroelectric projects were also damaged badly and there was great loss of human lives and property.

The Ministry of Power(MoP) subsequently constituted a committee for Short Term & Long Term Weather Forecast and Early Warning System to be put in place in such vulnerable projects. Thereafter, Central Electricity Authority (CEA) identified 47 nos. of vulnerable projects across the country, which are generally located above elevation of EL 1500 m or those which are first in the basin.

Out of these, 10 nos. belong to NHPC Limited and 2 nos. belong to CVPPPL (A Joint Venture Company between NHPC and JKSPDC). As per the guidelines issued by CEA/MoP, such projects were directed to establish Early Warning Systems (EWS) in the form of Automatic Water Level Recorders (AWLR) with telemetry at Gauge & Discharge sites at appropriate distance upstream of Dam / Barrage or maintain close coordination with upstream projects (if any) so that the sufficient lead time is available to project authorities for taking safety measures in case of any disaster. 

NHPC was also given the responsibility for setting up Master Control Room facility for monitoring the functioning of EWS of such vulnerable hydroelectric projects in the country belonging to Public /State/ Private sector. The software application has been integrated with inputs from Indian Meteorological Department (IMD) on real time basis for strengthening the forecasting / alerts. Presently all projects associated with NHPC and CVPPPL have been configured with this application and are getting benefitted. Hydroelectric projects belonging to other developers can also take advantage of this software portal in future. 

Besides the launch of EWS Software, NHPC witnessed major milstones at its 2000 MW Subansiri Lower Project wherein the Non-overflow block L4 of Dam successfully achieved top level of EL 210 m and Turbine works of Unit-3 were started with the lowering of first part of Lower Pit Liner on 08.08.2022. The diameter of lower pit liner is 7.8 mt. and each part weighs 5.5 ton. 2000 MW Subansiri Lower Hydroelectric Project is one of the most ambitious hydroelectric projects of India as well as of NHPC.

एनएचपीसी ने पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम-ईडब्ल्यूएस) के लिए एक इंटरनेट क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर की शुरूआत की तथा 2000 मेगावाट सुबानसिरी लोअर परियोजना में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की।


श्री ए.के. सिंहअध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकएनएचपीसी ने 8 अगस्त 2022 को एनएचपीसी निगम मुख्यालयफरीदाबाद में पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम-ईडब्ल्यूएस) के लिए एक इंटरनेट क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन की शुरूआत की। श्री वाई.के. चौबेनिदेशक (तकनीकी)श्री आर.पी. गोयलनिदेशक (वित्त) तथा एनएचपीसी के क्षेत्रीय कार्यालयोंपावर स्टेशनपरियोजनाओं और इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया। सॉफ्टवेयर वास्तविक समय के आधार पर पहचान की गई संवेदनशील परियोजनाओं के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में परियोजना/पावर स्टेशन के साथ निकट समन्वय के साथ-साथ नदियों के जल स्तर/बहाव की कड़ी निगरानी में सक्षम होगा। यह संबंधित परियोजना प्राधिकरणों/हितधारकों और स्थानीय प्रशासन को सावधान/चेतावनी जारी करेगा ताकि स्थानीय प्रशासन और लोगों को बाढ़ से पहले खाली करने या आश्रय के लिए सक्रिय किया जा सके तथा बाढ़ के दौरान लोगों को प्रतिक्रिया करने के लिए समय दिया जा सके। 

जलविद्युत परियोजनाएं आमतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में अवस्थित होती हैं और कई प्रकार की आपदाओं जैसे भूस्खलनबादल फटनाबाढ़हिमस्खलनजीएलओएफ (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड), एलएलओएफ (लैंडस्लाइड लेक आउटबर्स्ट फ्लड) आदि के लिए संवेदनशील होती हैं। हाल के वर्षों मेंहिमालयी क्षेत्र में कई आपदाएँ देखी गई हैंजिसके परिणामस्वरूप डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आ गई जिसमें कई लोगों की जान चली गई है और जलविद्युत परियोजनाएं और अन्य बुनियादी ढाँचे क्षतिग्रस्त हो गए। फरवरी 2021 में उत्तराखंड के चमोली जिले में एक प्राकृतिक आपदा आई थीजिसमें कुछ जलविद्युत परियोजनाएं भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और मानव जीवन और संपत्ति का बहुत नुकसान हुआ था।

तत्पश्चात् विद्युत मंत्रालय (एमओपी) ने ऐसी संवेदनशील परियोजनाओं में अल्पकालिक और दीर्घकालिक मौसम पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणाली (ईडबल्यूएस) स्थापित करने के लिए एक समिति का गठन किया। इसके बादकेंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने देश भर में 47 संवेदनशील परियोजनाओं की पहचान की जो आम तौर पर ईएल 1500 मीटर की ऊंचाई से ऊपर स्थित हैं या जो उस बेसिन में पहले हैं। इनमें से 10 एनएचपीसी लिमिटेड के और 2 सीवीपीपीपीएल (एनएचपीसी और जेकेएसपीडीसी के बीच एक संयुक्त उद्यम कंपनी) के हैं। सीईए/एमओपी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसारऐसी परियोजनाओं को बांध/बैराज की उचित दूरी पर गेज और डिस्चार्ज साइटों पर टेलीमेट्री के साथ स्वचालित जल स्तर रिकॉर्डर (एडब्ल्यूएलआर) के रूप में पूर्व चेतावनी प्रणाली (ईडब्ल्यूएस) स्थापित करने का या अपस्ट्रीम परियोजनाओं (यदि कोई हो) के साथ करीबी समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया था ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में सुरक्षा उपाय करने के लिए परियोजना अधिकारियों को पर्याप्त समय मिल सके। 

एनएचपीसी को सार्वजनिक/राज्य/निजी क्षेत्र से संबंधित देश में ऐसी संवेदनशील जलविद्युत परियोजनाओं के ईडब्ल्यूएस के कामकाज की निगरानी के लिए मास्टर कंट्रोल रूम सुविधा स्थापित करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। सॉफ्टवेयर को पूर्वानुमान/अलर्ट को मजबूत करने के लिए वास्तविक समय के आधार पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के इनपुट के साथ एकीकृत किया गया है। वर्तमान में एनएचपीसी और सीवीपीपीपीएल से जुड़ी सभी परियोजनाओं को इस एप्लिकेशन के साथ आकार दिया गया है जिससे वे लाभान्वित हो रही हैं। अन्य विकासकर्ताओं से संबंधित जलविद्युत परियोजनाएं भी भविष्य में इस सॉफ्टवेयर पोर्टल का लाभ उठा सकती हैं। 

ईडब्ल्यूएस सॉफ्टवेयर के लॉन्च के अलावाएनएचपीसी ने अपनी 2000 मेगावाट की सुबानसिरी लोअर परियोजना में महत्वपूर्ण उपलब्धियां भी हासिल की, जिसमें बांध के नॉन-ओवरफ़्लो ब्लॉक एल ने ईएल 210 मीटर के शीर्ष स्तर को सफलतापूर्वक हासिल किया और यूनिट –के टर्बाइन कार्यों को दिनांक 08.08.2022 को लोअर पिट लाइनर के पहले भाग को नीचे करके शुरू किया गया।

By Sarkaritel August 9, 2022 18:12