संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने किया संबोधित
नई दिल्ली, 24 मार्च। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन 2023 में कहा कि जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौतियों का सामना करने, भूजल स्तर बढ़ाने और जल भंडारण की क्षमता में वृद्धि के लिए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारत दुनिया का सबसे बड़ा बांध पुनर्वास कार्यक्रम लागू कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने अपने संबोधन में जल क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा 19 लाख 40 करोड़ से अधिक के निवेश समेत पेयजल और स्वच्छता के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के विषय में विस्तार से चर्चा की। शेखावत ने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों की भिन्नता के कारण भारत दुनिया में भूजल के सबसे बड़े उपयोगकर्ताओं में से एक है। भूजल स्तर को बहाल करने और ग्रामीण जल सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से जल की मांग और आपूर्ति में संतुलन के लिए सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है। पानी के उपयोग और संरक्षण के साथ-साथ व्यवहार में परिवर्तन के लिए भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।
स्वच्छता और शुद्ध पेयजल के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह सतत विकास लक्ष्य में निहित लक्ष्यों को प्राप्त करने में मददगार साबित होगा। वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। शेखावत ने कहा कि भारत के महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नमामि गंगे को संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा दुनिया के शीर्ष 10 फ्लैगशिप मिशन में शामिल किया गया। इस मिशन ने नदी के पुनर्जीवन, प्रदूषण में कमी, पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण और नदी बेसिन प्रबंधन के समग्र दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। जल मंत्री ने अर्थ गंगा के तहत हुए सराहनीय कार्यों को भी गिनाया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनिया गुटेरेस के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाइफ मिशन की शुरुआत की थी। लाइफ का मतलब ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ है। उन्होंने अपने संबोधन में सदस्य देशों द्वारा मिशन लाइफ को अपनाने की गुजारिश की।
केंद्रीय मंत्री ने अपने मंत्रालय द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों का चर्चा करते हुए कहा कि जल प्रबंधन भारत सरकार की प्राथमिकता में शुमार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2019 में इसके लिए एक अलग ‘जल शक्ति मंत्रालय’ का गठन किया। पांच सिद्धांत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सार्वजनिक वित्तपोषण, भागीदारी, जन भागीदारी और व्यवहार में सतत परिवर्तन सुनिश्चित करने हेतु आग्रह इस मंत्रालय के कार्यों का आधार है। यह मंत्रालय जन सहभागिता से देश में ग्रामीण स्वच्छता और पेयजल क्षेत्र में योजनाएं संचालित कर रहा है।
