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June 5, 2026
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जल को लेकर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर करना होगा काम : शेखावत

18gajendra shekhawat

– बीजेएस के राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने पानी को लेकर विस्तार से रखी बात
– बोले, ईआरसीपी टॉप 5 प्राथमिकता वाले राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स की सूची में शामिल

उदयपुर 17 दिसंबर। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जल को लेकर हमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होगा, क्योंकि यह देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। सबको एक साथ आकर काम करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि चूंकि संविधान में जल राज्यों का विषय है, इसलिए भारत सरकार प्रत्यक्ष रूप से सीधा काम नहीं कर सकती।

शनिवार को भारतीय जैन संघटना (बीजेएस) के राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने जल, अर्थव्यवस्था, अमृत महोत्सव समेत अनेक विषयों पर विचार रखे। इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर्स की चर्चा करते हुए शेखावत ने कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कल्पना की थी कि हम सरप्लस बेसिन से डेफिसिट बेसिन में पानी ट्रांसफर करें। हम उस विषय को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। मैं गर्व से कह सकता हूं कि जो 30 इंटरलिंक हमने चिह्नित किए थे, उसमें से 15 की डीपीआर बनकर पूरी हो चुकी है। मंच पर मौजूद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी से मुखातिब होते हुए शेखावत ने कहा कि जोशी साहब मैं खुशी के साथ कहता हूं कि ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को मैंने उन टॉप 5 प्राथमिकता वाले राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स की सूची में शामिल किया है, जिन पर भारत सरकार प्राथमिकता के साथ इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर्स की योजना में काम करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी जोशी के कथन कि भारत को आजादी के 75 साल बाद जहां होना था, वहां हम आ गए हैं, का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि जब देश आजाद हुआ था, तब की परिस्थितियों और आज की परिस्थितियों को देखें तो निश्चित रूप से हम गर्व करेंगे कि हमने बहुत कुछ पा लिया, लेकिन यह विचार आत्ममुग्धता लाता है। आत्ममुग्धता ठहराव लाती है। ठहरा हुआ पानी सड़ जाता है, यह हम सब जानते हैं। इसलिए हमें प्रतिदिन इस बात की चर्चा करने की आवश्यकता है कि हम क्या कर सकते थे? जो हम नहीं कर पाए।

जोशी जी मुझे अपना शिष्य बना लीजिए…
मंचासीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी की ओर देखते हुए शेखावत ने कहा कि मुझे क्षमा करेंगे सीपी जोशी साहब… नाथद्वारा में जब आप मिले थे तो मैंने आपसे कहा था कि आप मुझे अपना स्टूडेंट बना लें। तब आप हंसते-हंसते टाल रहे थे, क्योंकि वह मुरारी बापू की रामकथा का स्थल था। मैंने कहा था कि जिस क्षेत्र में हम दोनों काम कर रहे हैं, उसमें आप से बड़ा पुरोधा मुझे आज तक कोई नहीं मिला। मुझसे अच्छा स्टूडेंट आपको नहीं मिलेगा। यह मैं विश्वास के साथ कहता हूं। मेरा पूरा अधिकार है कि मैं आपका शिष्य बनूं।

समय के साथ पानी को लेकर भूल रहे संस्कार
जल संरक्षण की चर्चा करते हुए शेखावत ने कहा कि मुझे याद आता है। बचपन में मेरी दादी मां और उनके पूर्वज, उनका जिस तरह से पानी को लेकर संकल्प था, ताकि पानी की सुचिता बनी रहे। पानी को लेकर जिस तरह से पूरा गांव और क्षेत्र व्यवहार करता था, हम कहीं ना कहीं इस भौतिकवाद के दौर में उसे भूल गए हैं। वह संस्कार और कर्तव्य जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होते थे, उसमें कहीं ना कहीं हमारी बीच की पीढ़ी ने अमानत में कयामत की है।

युवाओं की दाढ़ी पर ली चुटकी
पानी की बर्बादी पर आने वाले विज्ञापनों पर चुटकी लेते हुए शेखावत ने कहा कि जब पानी बचाने की बात होती है तो सब कहते कि महिलाएं पानी बहुत बर्बाद करती हैं, लेकिन जब कोई भी विज्ञापन देखिए, उसमें आएगा दाढ़ी बनाते समय पुरुष नल बंद नहीं करते, इसलिए पानी ज्यादा बर्बाद होता है। शायद इसी से प्रेरणा लेकर आजकल युवा पीढ़ी ने दाढ़ी बढ़ाना शुरू किया है। ये भी हो सकता है, उन्होंने मोदी जी या सीपी जोशी जी से दाढ़ी बढ़ाने की प्रेरणा ली हो। वैसे, आजकल तो दूल्हे भी दाढ़ी वाले होने लग गए हैं। जब मेरी शादी हुई थी, तब शादी के समय सुबह-शाम दोनों टाइम सेविंग करते थे। आज युवा शादी से 15 दिन पहले दाढ़ी बढ़ाना शुरू कर देते हैं।

10.75 करोड़ घरों तक पहुंच रहा नल से जल
जल जीवन मिशन की जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि हमारे यहां 12 साल की बेटी सिर पर मटका लेकर पानी लाना शुरू करती है और यह क्रम 80 साल की उम्र तक चलता रहता है। पानी ढोने के लिए वह जीवन भर परिक्रमा करती है। जैसे हमारे यहां मंदिर और नदियों की परिक्रमा का विधान है। वैसे इनदिनों तो भारत जोड़ो की परिक्रमा भी चल रही है। यदि 12 से 80 साल तक की परिक्रमा के कदमों को जोड़ दिया जाए तो पृथ्वी के तीन चक्कर लगाए जा सकते हैं। इसी अभिशाप से मुक्त कराने का लक्ष्य लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जल जीवन मिशन योजना प्रारंभ कराई। जब हमने कार्य प्रारंभ किया था, तब जो आंकड़ा 16% था, वह आज 56% को छू गया है। 2019 में देश के 3.23 करोड़ परिवारों तक नल से जल पहुंच रहा था, आज 10.75 करोड़ घरों तक पानी पहुंचा दिया गया है। हालांकि, अभी हमें और तेज गति से काम करने की आवश्यकता है।