इस वर्ष विश्व जैव ईंधन दिवस – 2022 को “कार्बन तटस्थ विश्व की ओर जैव ईंधन” की थीम के साथ मनाया जा रहा है। यह विषय जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु पाँच अमृत तत्व पंचामृत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पंचामृत में 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन, 2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 500 गीगावाट तक, अक्षय स्रोतों के माध्यम से 50% ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति, 2030 तक 1 अरब टन कार्बन उत्सर्जन में कमी, 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 45% से कम की कमी शामिल है।
स्वच्छ पर्यावरण के उपरोक्त लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में जैव ईंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत ने देश में जैव ईंधन को बढ़ावा देने हेतु 2018 में जैव ईंधन नीति प्रकाशित की है। जैव ईंधन नीति जैव ईंधन को दो समूहों में वर्गीकृत करती है। एक है पहली पीढ़ी का जैव ईंधन और दूसरा है उन्नत जैव ईंधन। उन्नत जैव ईंधन के तहत, 3 जी जैव ईंधन नामक जैव ईंधन की एक श्रेणी है जिसमें शैवाल से उत्पादित जैव ईंधन शामिल है। चूंकि शैवाल स्थलीय बायोमास की तुलना में प्रति क्षेत्र अधिक बायोमास बना सकते हैं, इसलिए वे सीमांत भूमि या समुद्र में भविष्य के जैव ईंधन के उत्पादन हेतु बहुत आशाजनक है।
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने सूक्ष्म शैवाल से बायोडीजल के उत्पादन की प्रक्रिया विकसित की है। विश्वविद्यालय में प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण हेतु परीक्षण जारी है। शुष्क आधार पर, शैवाल से 25% तेल का उत्पादन एवं शैवाल से तेल निकालकर इसे आगे संसाधित करके बायोडीजल का उत्पादन भी किया जा सकता है।
शैवाल को प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से ऑक्सीजन और बायोमास में परिवर्तित करके कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को काफी कम करने हेतु भी जाना जाता है। सूक्ष्म शैवाल को तालाब, झील और रेसवे जैसे खुले-संस्कृति प्रणालियों, या फोटोबायोरिएक्टर जैसे अत्यधिक नियंत्रित बंद-संस्कृति प्रणालियों में उगाया जा सकता है।
भारत सरकार ने 2030 तक 5% बायोडीजल सम्मिश्रण प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु लगभग 800 करोड़ लीटर बायोडीजल की आवश्यकता होगी। शैवाल से बायोडीजल के उत्पादन के वैकल्पिक मार्ग के लक्ष्य को प्राप्त करना बहुत ही आशाजनक है। शैवाल से बायोडीजल का उत्पादन अभी प्रारंभिक चरण में है। उच्च दक्षता वाले शैवाल उत्पादन और उत्पादन लागत को कम करने हेतु दुनिया भर में शोध किए जा रहे हैं। इसके लिए कई शोधकर्ताओं ने रास्ता खोजा है और भारत में भी, व्यावसायिक स्तर पर शैवालसे बायोडीजल का उत्पादन करने हेतु प्रौद्योगिकी परीक्षण के चरण में है।
