नई दिल्ली,16 अगस्त 2018 : लोक सभा अध्यक्ष, श्रीमती सुमित्रा महाजन ने श्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। अपने सन्देश में श्रीमती महाजन ने कहा :
‘भारतीय राजनीति के आसमान का तेजस्वी तारा आज अस्त हो गया। भारत रत्न ही नहीं सचमुच भारत माता के मुकुट का एक दैदीप्यमान रत्न जिसने साहित्य हो या राजनीति, सामाजिक सौहार्द की बात हो या राजनीतिक संयम और सभी दलों के नेताओं को अपनी सुरम्य भाषा से प्रभावित कर, एकत्रित करके एक अनूठी मिसाल कायम की। ऐसा अनोखा बेमिसाल रत्न जो भारत माता के मुकुट को सुशोभित कर रहा था, आज काल के खोह में समा गया – मुकुट का वह कोंदण – वह जगह खाली हो गयी ।
संघ के स्वयंसेवक से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर, युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी, भारतीय राजनीति के क्षितिज पर उभरे सर्वाधिक चमकदार सितारे थे। भारत माता के महानतम सपूतों में से एक थे। उनके मोहक व्यक्तित्व का चुम्बकीय प्रभाव भारत के जनमानस पर था। जब वे संसद, सभा, गोष्ठियों एवं सम्मेलनों में भाषण दिया करते थे तो श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर बातों को सुनते थे और आनंदित होते थे। वे जितने प्रयोगधर्मी थे उतने ही व्यावहारिक भी। उनके विचार, वक्तव्य, कथन एवं कविता सीधे हृदय से उद्गारित होते थे।
एक संवेदनशील कवि, एक राष्ट्रवादी पत्रकार, एक जननेता, एक राष्ट्रनायक, एक युगद्रष्टा ऐसे थे हमारे वाजपेयी जी। कार्यकर्ताओं के कार्यकर्ता एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं के भी नेता थे।
एक राजनीतिज्ञ के रूप में सिद्धान्तों पर आधारित राजनीति, साहसिक निर्णय क्षमता, दूरदृष्टि, सौम्य व्यवहार एवं हास-परिहास उनकी विशिष्ट पहचान थी। बहुत ही हाजिरजबाबी एवं साफगोई से सच्ची बात बड़ी सरलता से कह देते थे। वे दार्शनिक अंदाज़ में संसद में अपनी बात रखते थे तो उनमें उनका दर्शन, चिंतन एवं प्रत्युत्पन्नमतित्व एवं विलक्षण प्रतिभा स्वतः ही दिखने लगती थी।
न सिर्फ मेरे लिए बल्कि मेरे जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के लिए वे एक पितृपुरुष, गुरू एवं मार्गदर्शक थे जिन्होंने अपने प्रेरणादायी व्यक्तित्व से लाखों कार्यकर्ताओं को अभूतपूर्व प्रेरणा एवं विश्वास दिया। मुझे उनका अगाध स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ तथा भारतीय जनता पार्टी आज जो विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है, उसको खड़ा किया।
सच कहा जाए, तो वह अपने जीवनकाल में ही एक युग परिवर्तक नेता बन गए थे और यह उनके व्यक्तित्व और विश्वास के बल पर हुआ। दस कार्यकाल के लिए सुविख्यात सांसद, केन्द्रीय मंत्री और बाद में तीन कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री के रूप में वह महान मूल्यों और भावों का मूर्त रूप थे और उन्होंने ’सबके विकास‘ पर पूरा ध्यान दिया। उनके देहावसान से हमने एक ऐसे दूरदर्शी नेता को खो दिया है जिसने भारत को हमारे सपनों की भूमि बनाने का स्वप्न देखा और जो इसे साकार करने के लिए अथक प्रयास करता रहा। उनके महाप्रयाण से राष्ट्र की अपूरणीय क्षति हुई है।‘
