REC elevates the power sector yet again; sanctions ₹22,000 crore under new LPS Rules

Sarkaritel
By Sarkaritel August 4, 2022 13:59

REC elevates the power sector yet again; sanctions ₹22,000 crore under new LPS Rules


Gurugram, 4th August, 2022: As a step towards addressing the issue of mounting dues of the State power utilities which has now crossed ₹1,50,000 crore, the Ministry of Power, Govt. of India has issued Electricity, (Late Payment Surcharge and Related Matters) Rules, 2022 (LPS Rules 2022). This initiative works with the sole aim of financially strengthening the electricity suppliers and bringing financial discipline in the power sector.

Furthermore, it will ensure that the end consumer not only gets reliable and quality uninterrupted supply of electricity, but additionally it alleviates the interest burden on account of late payment of power purchase dues by the State utilities. REC and PFC (State run financial institutions in the power sector) were advised by the Ministry of Power to extend their support to Discoms for timely payment of their dues under the new LPS rules.

Major states such as Rajasthan, Jharkhand, Tamil Nadu, Maharashtra, J&K, Madhya Pradesh and Uttar Pradesh with pending power purchase dues to the tune of almost ₹96,000 crore are complying with the rules. In line with the same, the distribution licensees of the above states will be paying around ₹2,600 crore to their electricity suppliers on the 5th of August, 2022. REC has provided a financial assistance of approximately ₹22,000 crore on 3rd August 2022 for clearing the outstanding dues by the distribution licensees of Jharkhand, Rajasthan, Chhattisgarh and Jammu & Kashmir.

These rules will be applicable to outstanding dues of generating companies, inter-state transmission licensees, and electricity trading licensees (suppliers). As per the rules, the total outstanding dues including late payment surcharge by a distribution licensee may be cleared in a maximum of 48 Equated Monthly Instalments (EMIs). The distribution licensee shall specify within thirty days of the promulgation of these rules the amount of outstanding dues and number of instalments in which they would be paid to the electricity suppliers.

In case of delay in payment of an instalment, a late payment surcharge will be payable on the entire outstanding dues as on the date of notification of the rules. There will be no additional LPS payable on the outstanding dues if timely payment is made. Thus, timely payment of outstanding dues forms the core of the LPS rules.


आरईसी द्वारा विद्युत क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए नए एलपीएस नियमों के तहत 22,000 करोड़ की मंजूरी दी गयी

 

गुरुग्राम, 6 अगस्त 2022:राज्य विद्युत संस्थाओंके बढ़ते बकाया, जो अब ₹1,50,000 करोड़ को पार कर गया है, के मुद्दे का समाधान करने की दिशा में कदम उठाते हुएविद्युत मंत्रालय, भारत सरकार ने विद्युत (देर से भुगतान अधिभार और संबंधित मामले) नियम, 2022 (एलपीएस नियम 2022) जारी किया है। यह पहल बिजली आपूर्तिकर्ताओं को वित्तीय रूप से मजबूत करने और विद्युत क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन लाने के प्रमुखउद्देश्य के साथ काम करती है। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया जाएगाकि अंतिम उपभोक्ता को न केवल बिजली की विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण निर्बाध आपूर्ति मिले, बल्कि यह विद्युत संस्थाओं द्वारा बिजली खरीद की देय राशि के देर से भुगतान के कारण ब्याजका बोझ कम हो सके। विद्युत मंत्रालयद्वाराआरईसी और पीएफसी (विद्युत क्षेत्र में राज्य द्वारा संचालित वित्तीय संस्थान) को नए एलपीएस नियमों के तहत अपने बकाया समय पर भुगतान के लिए डिस्कॉम को सहयोग देने की सलाह दी गयी थी।

 

राजस्थान, झारखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, जम्मूव कश्मीर, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य लगभग ₹96,000 करोड़ की बकाया बिजली खरीद के साथ नियमों का पालन कर रहे हैं। उसी के अनुरूप, उपरोक्त राज्यों के वितरण लाइसेंसधारी 5 अगस्त, 2022 को अपने बिजली आपूर्तिकर्ताओं को लगभग ₹2,600 करोड़ का भुगतान करेंगे। आरईसी ने 3 अगस्त 2022 को झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और जम्मू-कश्मीर के वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा बकाया राशि केभुगतान हेतुलगभग ₹22,000 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

 

ये नियम उत्पादन कंपनियों, अंतर-राज्यीय पारेषण लाइसेंसधारियों और बिजली कारोबार के लाइसेंसधारियों (आपूर्तिकर्ताओं) के बकाया देय पर लागू होंगे। नियमों के अनुसार, वितरण लाइसेंसधारी द्वारा देर से भुगतान अधिभार सहित कुल बकाया राशि को अधिकतम 48 समान मासिक किस्तों (ईएमआई) में चुकाया जा सकता है। वितरण अनुज्ञप्तिधारी इन नियमों के लागू होने के तीस दिनों के अंदर बकाया देय राशि और बिजली आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान की जाने वाली किश्तों की संख्या निर्दिष्ट करेगा। किश्त के भुगतान में देरी के मामले में, नियमों की अधिसूचना की तिथि के अनुसार पूरे बकाया देय राशि पर देर से भुगतान अधिभार देय होगा। यदि समय पर भुगतान किया जाता है तो बकाया देय राशि पर कोई अतिरिक्त एलपीएस देय नहीं होगा। इस प्रकार, बकाया राशि का समय पर भुगतान एलपीएस नियमों का प्रमुख भागहै।

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By Sarkaritel August 4, 2022 13:59