भूजल संरक्षण की परंपरागत विधि खेत पर मेड मेड पर पेड़ वर्षा बूंदे जहां गिरे वही रोकें : उमा शंकर पांडे जल योद्धा

ameya sathaye
By ameya sathaye January 12, 2021 12:36

भूजल संरक्षण की परंपरागत विधि खेत पर मेड मेड पर पेड़ वर्षा बूंदे जहां गिरे वही रोकें : उमा शंकर पांडे  जल योद्धा


छोटे छोटे प्रयोग सदैव समाज में बड़े बदलाव लाए हैं ऋषि और कृषि की परंपरागत भारत भूमि में पुरखों की परंपरागत विधियां आज भी प्रासंगिक बुंदेलखंड के छोटे से गांव जखनी से निकली मेड़बंदी परंपरागत जल संरक्षण विधि आज संपूर्ण भारत में अनुकरणीय बन गई है राज समाज सरकार तीनों इस विधि को भू जल संरक्षण की दिशा में उपयोगी मानते हैं इस विधि को जागृत करने वाले सर्वोदई उमा शंकर पांडे ने कहा कि पानी हमारी संस्कृति संस्कार का हिस्सा हैं।

इस पृथ्वाी पर 71 प्रतिशत पानी होने के बाद भी सिर्फ 2़ण्5 फिसदी पानी पिने योग्य है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की रिर्पोट के अनुसार 2ण्5 अरब लोगो के पास साफ सुथरा पीने योग्य पानी नही है दुनिया भर मे 5 हजार बच्चे प्रतिदिन अशुद्ध पानी पीने के कारण मर जाते है 25 लाख लोग दूनिया मे प्रतिवर्ष प्रदूषित जल बीमारी के कारण मरते है प्राणी और प्रकृति की कल्पना जल के बिना सम्भव नही है पृथ्वी मे जितने भी जीव है उनका जीवन जल पर निर्भर है वेदो और धर्म शास्त्रों ने जल ही जीवन माना है पानी मे ही सारे देवता रहते है। मानव के प्राराम्भ से अन्त तक के साभी अनुष्ढानो की पूजा जल से या जल मे होती है।

भारत के कुछ भाग को छोड दिया जाये तो पूरी दुनिया मे जल संकट है पानी बनाया नही जा सकता केवल बचाया जा सकता है। जिस गति से जनसंख्या बढ रही है पानी की माॅग बढ रही है उस गति से हम सरकारो के प्रयासो के बावजूद जल स्त्रोत न बढा पा रहे है नही जल संरक्षण कर पा रहे है।

पानी समाज को जोडता भी है और तोडता भी है भू जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण भू जल की गुणवत्ता में कमी आई तथा भू जल स्तर में दिन.प्रतिदिन निचे जा रहा हैए जल मे शहद है ए अमृत हैए दूध हैए घी हैए फल हैए अन्य हैए बिजली हैए ऊर्जा है। जल में आध्यात्मिक शक्ति है पानी हमारी संस्कृति संस्कार का हिस्सा है। पानी की एक पतली सी लकीर एक नई सदैव छोटे छोटे प्रयोग बड़े बदलाव लाते हैं जो भूजल बढ़ाएगा उसे सिद्धि प्रसिद्धि और समृद्धि मिलेगी जिस देश में गंगाए यमुनाए नर्मदाए गोदावरीए कावेरीए मंदाकिनीए सरयूए जैसी पवित्र नदियां हो उस देश में पानी विक्रय की वस्तु बने पानी का व्यापार हो उस ऋषि और कृषि के देश में हमने समुदाय के आधार पर अपनी पुरखों की भू जल संरक्षण विधि खेत पर मेड मेड पर पेड़ को पूरे देश में लागू कराया है हमारी विधि ने देश में जल ग्राम पद्धति को जन्म दिया यद्यपि हमारा समुद्र में एक बूंद के बराबर है हमें बहुत कुछ प्रयास करना है यह जरूर है कि हमने अंधेरा अंधेरा कहने की किसानों नौजवानों मजदूरों को साथ लेकर परंपरागत तरीके से अपने खेतों को अपने गांव को पानीदार बनाने की कोशिश की है

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By ameya sathaye January 12, 2021 12:36